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रविशंकर प्रसाद बोले- भरोसा नहीं तो कांग्रेस की सरकारें भी दें इस्तीफा
पटना। बिहार में भारतीय जनता पार्टी के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। साथ ही कांग्रेस को उन राज्यों की सरकारों के बारे में भी फैसला करना चाहिए, जहां वह इसी चुनावी व्यवस्था के जरिए सत्ता में पहुंची है।
#WATCH दिल्ली: भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कहा, "आज राहुल गांधी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के निवास पर मॉक पार्लियमेंट कर रहे हैं। ये लोग संसद में चर्चा में भाग नहीं लेते हैं। ये देश की जनता के साथ मजाक कर रहे हैं... नेहरू जी वोट चोरी से प्रधानमंत्री बने थे... आप संवैधानिक संस्थाओं का कब तक मजाक उड़ाएंगे। जब आपके पक्ष में फैसला होता है तो चुनाव आयोग ठीक होता है... यह शर्मनाक है। मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि आप में हिम्मत है तो आपको इस्तीफा देना चाहिए..."
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 31, 2026
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस जब चुनाव जीतती है, तब उसे चुनाव आयोग और मतदान प्रक्रिया से कोई शिकायत नहीं होती, लेकिन हार मिलने पर वह संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने लगती है।
उन्होंने कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की चुनावी जीत का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि यदि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी है, तो इन राज्यों में मिली जीत को कांग्रेस किस आधार पर स्वीकार करती है।
भाजपा सांसद ने हालिया उपचुनावों और विधान परिषद चुनावों के परिणामों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों में कांग्रेस को लगातार चुनावी हार का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, पार्टी को अपनी संगठनात्मक कमजोरियों पर ध्यान देना चाहिए।
रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेता निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को प्रभावित कर रहे हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर पारदर्शिता तथा निष्पक्षता के सवाल उठाती रही है। पार्टी ने निर्वाचन आयोग के कुछ फैसलों पर आपत्ति भी जताई है।
चुनाव आयोग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी इस राजनीतिक टकराव ने एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
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